जागरूक रहें तो समय से पहले पा सकते हैं होम लोन के बड़े बोझ से छुटकारा

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Home, House

     इन्वेस्टमेंट बैंकर यस जैन और उनकी पत्नी नम्रता ने वर्ष 2008 में जयपुर में अपना पहला घर खरीदा था। इसके लिए उन्होंने 20 वर्ष के लिए 25 लाख रुपये होम लोन लिया। हालांकि, लोन लेने की प्लानिंग के वक्त से ही दोनों ने सोच रखा था कि 20 वर्ष से पहले ही कर्ज चुकता कर देना है और हुआ भी यही। दोनों ने मिलकर महज चार वर्षों में पूरा का पूरा लोन वापस कर दिया, बिना किसी परेशानी के। जैन ने बताया, ‘हम हर साल मिलनेवाले बोनस के 2.2 लाख रुपये, इंसेटिव्स के 65 हजार रुपये और महीने के खर्च से बची रकम, सबको मिलाकर लगातार पार्ट पेमेंट्स करते रहे।’ इस तरह जैन दंपती को ब्याज पर लगनेवाले 21 लाख रुपये बच गए। ऐसा नहीं है कि इस दंपती ने कोई अनोखा काम कर दिया। अगर सही योजना बनाकर उचित अनुशासन के साथ आगे बढ़ा जाए तो ऐसा सबके लिए संभव है…

पार्ट पेमेंट की ताकत

    लोन चुकता करने की प्रक्रिया में ईएमआई से ज्यादा रकम जमा करने के लिए कहीं से बड़ी रकम आने का इंतजार नहीं करें। थोड़े-थोड़े ज्यादा पैसे जमा करके भी ब्याज की बड़ी रकम बचा सकते हैं। जैन दंपती ने भी यही किया था। वर्ष 2008 में पति-पत्नी की कुल सालाना आय 14.40 लाख रुपये थी जबकि उनकी लोन ईएमआई और मुंबई के फ्लैट का किराया क्रमशः 21 हजार और 22 हजार रुपये थे। घर में भी हर महीने 50 हजार रुपये खर्च हो जाता था। 2014 में दोनों ने हैदराबाद में एक प्रॉपर्टी ली और बाद में भोपाल में एक कमर्शल प्रॉपर्टी खरीदी। इसके लिए फंडिंग बचत की रकम के अलावा जयपुर की प्रॉपर्टी और पुश्तैनी जमीन की बिक्री से की। आज हैदारबाद और भोपाल की प्रॉपर्टीज से उन्हें हर महीने 40 हजार रुपये मिल रहे हैं।

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     छोटी-मोटी बचत को भी लोन प्रीमेंट में लगा देने से बड़ी सहूलियत हो जाती है। नोएडा के चार्टर्ड अकाउंटैंट अमरदीप सिंघल ने इसी नुस्खे से होम लोन की बकाया रकम 33 लाख को घटाकर 18 लाख कर ली। उन्होंने बताया, ‘वर्ष 2016 में अपने क्लायंट्स से 10 लाख और 5 लाख रुपये की मोटी रकम मिली। मैंने इसे अपने कर्ज का बोझ घटाने में इस्तेमाल किया।’ हालांकि, उन्हें कार खरीदने की योजना टालनी पड़ी। 9 प्रतिशत की ब्याज दर से 20 वर्ष के लिए लिया गया 50 लाख रुपये का होम लोन 9 वर्ष 3 महीने में चुकाया जा सकता है, अगर हर 12वीं ईएमआई के बाद 3 लाख रुपये अतिरिक्त जमा करवा दें।

बचत की रकम का इस्तेमाल

      मुंबई निवासी रोहित मेहता ने घर खरीदने के लिए 20 लाख रुपये लोन लेने की योजना बनाई। साथ ही, यह भी तय किया कि वक्त से पहले लोन चुकता कर देना है। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी बचत की पूरी रकम घर खरीदने में खर्च नहीं की, बल्कि लोन लेने के बाद उसे समय से पहले चुकाने में इसका इस्तेमाल किया। मैंने इसी रकम से ईएमआई के अलावा लोन के 15 लाख रुपये चुका दिए।’ अगर आपने मेहता की तरह पैसे नहीं बचाए, तो दुखी होने की जरूरत नहीं है। बहुत पहले कभी, कहीं निवेश कर रखी हो तो उसका इस्तेमाल लोन को समय से पहले खत्म करने में कर सकते हैं।

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ईएमआई बढ़ाकर वक्त घटाएं

      अगर आपके पास फंड नहीं है और न ही तमाम खर्चों के बाद पैसा बचता है तो भी समय से पहले आप कर्ज चुका सकते हैं। मॉगिजवर्ल्ड के फाउंडर विपुल पटेल ने कहा, ’9 प्रतिशत की ब्याज दर से 20 वर्ष के लिए 50 लाख रुपये के लोन पर अगर हर वर्ष 15 प्रतिशत ज्यादा ईएमआई चुकाया जाए तो भी 97वें महीने पूरा लोन चुकता हो जाएगा।’ अगर 10 से 15 प्रतिशत तक ईएमआई बढ़ाने मुश्किल हो रहा हो तो इतना तो जरूर सुनिश्चित कर लें कि लोन पर ब्याज दर बढ़ने पर ईएमआई का वक्त नहीं बढ़ जाए। फिनपीस टेक्नॉलजीज के को-फाउंडर निर्मल रेवरिया ने कहा, ‘जब ब्याज दर ऊपर जाए तो अवधि नहीं बढ़ने दें, बल्कि ईएमआई की रकम बढ़ा दें। अगर ब्याज दर घटे तो ईएमआई की रकम घटाने की जगह अवधि ही कम करें। इससे आपको तेजी से लोन चुकता करने में मदद मिलेगी।’

दूसरे लक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं करें

      लोन प्रीपेमेंट से मानसिक शांति तो मिलती है, लेकिन इसके लिए दूसरे लक्ष्यों को नजरअंदाज मत करें। आपको प्रॉपर्टी में किए गए निवेश का भी विस्तृत आकलन करना चाहिए। अगर आपके हाथ में पैसे नहीं बच रहे हों तो इसे बेचना भी बुरा नहीं है।

टैक्स छूट की लालच

    कर्ज लेनेवाले कुछ लोग होम लोन पेमेंट पर चुकाए गए मूलधन पर इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये और दिए गए ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये पर टैक्स छूट प्राप्त करने के लिए लोन प्रीपेमेंट का विकल्प नहीं चुनते हैं। क्या यह सही रणनीति है? इस पर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है। रेवरिया का कहना है कि प्रीपेमेंट करना भी है तो टैक्स छूट को ध्यान रखकर करें। वहीं, नवीन पैसाबाजार के को-फाउंडर और सीईओ नवीन कुकरेजा ने कहा, ‘टैक्स छूट की रकम ब्याज दर में बचाई रकम से कम होगी। इसलिए, टैक्स छूट पाने के लिए प्रीपेमेंट नहीं करना गलत रणनीति है।’

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source: नवभारत टाइम्स.

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