क्या है रियल एस्टेट चक्र… प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जरूरी है उसे बेचने की प्लानिंग करना

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     मौजूदा दौर में रीयल एस्टेट में निवेश करना कोई बड़ी बा नहीं…कहने का मतलब यह है कि प्रॉपर्टी खरीदना कोई पहाड़ चढऩे जैसा काम नहीं रहा। बेशक, इससे जुड़े लोग आपको प्रॉपर्टी खरीदने की नेक सलाह दें और ये कहें कि प्रॉपर्टी पर निवेश करने का ये सही समय है, तो ऐसे में आप भविष्य पर नजर जरूर डाल लें यानी रीयल एस्टेट में निवेश करने से पहले इसमें से निकलने की प्लानिंग जरूर कर लेनी चाहिए।

     दरअसल, रीयल एस्टेट एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट का क्षेत्र है, जहां कम से कम आपको ५ साल का समय तो देना ही पड़ता है। यदि आप यह सोचते हैं कि आज खरीदकर, कल उसे बेचकर अमीर बन जाओगे, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल होगी। हम आपको बता दें कि रीयल एस्टेट में आपको तभी मुनाफा मिल सकता है, जब आप किसी संपत्ति में कम से कम 4-5 सालों के लिए निवेश करते हैं।

      गौरतलब है कि साल 2008 की शुरुआत में जब भारत में रीयल एस्टेट बाजार अपने शीर्ष पर था, तब बहुत सारे निवेशकों ने अपनी प्रॉपर्टी फ्लिप की थीं। फ्लिप का मतलब यह है कि कोई प्रॉपर्टी खरीदकर उसके भाव बढऩे का कुछ महीने तक इंतजार कीजिए फिर उसे तत्काल फायदे के लिए बेच दीजिए। लेकिन अब यह ट्रेंड खत्म हो गया है। ऐसे में जरूरी यह है कि अगर आप रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको रियल एस्टेट बाजार की खासियतों और बुराइयों से पूरी तरह परिचित होना होगा, साथ ही यह भी जानना होगा कि फायदे का सबसे उपयुक्त समय कब आता है, ताकि प्रॉपर्टी बेच कर मुनाफा कमाया जाए।

इन बातों का रखें विशेष खयाल…

-  रियल एस्टेट में निवेश करने वाले निवेशकों को इंवेस्टमेंट होराइजन- यानी खरीदारी और दोबारा बेचने के बीच की अवधि का निर्धारण कर लेना चाहिए।

- दोबारा बिक्री के समय टैक्स का क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में भी विस्तृत विश्लेषण करना जरूरी है।

-  लीगल फीस व दलाली जैसे खर्चे का भी पहले से ही आकलन कर चलना चाहिए।

-  समय से पहले लोन चुकाने पर प्री-पेमेंट पेनाल्‍टी और स्टांप ड्यूटी का खरीदार पर क्या असर पड़ेगा, इसे भी समझ लें।

-  प्रॉपर्टी खरीदने वाले को इस बात का भी आकलन करना चाहिए कि प्रॉपर्टी की दोबारा बिक्री करने से पहले इसकी साज-सज्जा या विस्तार कराना फायदेमंद होगा या उसे जैसा है वैसी ही स्थिति में बेच देना ठीक रहेगा।

-  निवेश की अनुमानित अवधि तक संभावित रेंटल इनकम और प्रॉपर्टी की बिक्री से प्राप्‍त होने वाली रकम का भी अनुमान लगाया जाना चाहिए।

-  टाइमिंग चाहे जो भी हो, प्रॉपर्टी खरीदने वाले को सर्वोच्च गुणवत्ता वाले संपत्ति आधार पर हमेशा फोकस करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि बिल्डिंग की खासियत व गुणवत्ता, उसकी लोकेशन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दें।

रीयल एस्टेट के चक्र को समझना जरूरी…

      बाजार के चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हड़बड़ा कर, जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी प्रॉपर्टी को बेचना एक गलत रणनीति है। दरअसल यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान रियल एस्टेट के चक्र में बाजार आखिर स्थिर कब होगा। यह ध्यान रहे कि सभी उद्योगों का एक चक्र होता है, कारोबार हो या डेमोग्राफिक चक्र यह दोनों पर लागू होता है। ठीक इसी तरह से रियल एस्टेट का भी एक चक्र होता है। इस दुनिया में सबसे ज्यादा लाभ तब कमाया जा सकता है, जब खरीदारी ऐसे समय में और सस्ती दरों पर की जाए, जब कोई इसे खरीदना नहीं चाहता हो और इसे ऊंची कीमत पर तब बेचें, जब मांग में मजबूती दिखाई दे रही हो।

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source: पंजाब केसरी, नई दिल्ली.

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