कहीं गले की फांस तो नहीं बन जाएगा आपके सपनों का घर?

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      सपनों के घर का आइडिया सबका अलग होता है लेकिन होता जरूर है। घर खरीदने के लिए सबसे बड़ा मुद्दा पैसा ही है। युवा पीढ़ी जिसकी सैलरी तेजी से बढ़ रही है वह घर पर सेविंग्स और सैलरी लगाने को तैयार है लेकिन क्या यह सही फैसला होगा? आइए एक्सपर्ट्स की सलाह और ऐनालिसिस से समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे सपनों का घर सुख लाएगा टेंशन नहीं…

       एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर खरीदने वालों की आकांक्षाओं में पिछले कुछ सालों में गजब का अंतर आया है। अब वे केवल बड़ी प्रॉपर्टी नहीं खरीदना चाहते बल्कि ऐसा घर चाहते हैं जहां उन्हें ज्यादा से ज्यादा सर्विसेज मिलें। बढ़ती इनकम, आसान लोन और किस्तों के चलन ने भी युवा कन्ज्यूमर बेस बढ़ा दिया है। बैंक प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 80 से 85 प्रतिशत ही लोन देते हैं ऐसे में होमबायर्स अपनी सेविंग्स का बड़ा हिस्सा डाउन पेमेंट पर लगाने से नहीं हिचकते। ईटी वेल्थ के सर्वे के मुताबिक, हर तीन में से एक होमबायर अपनी कुल सेविंग्स का 50 प्रतिशत हिस्सा डाउन पेमेंट पर लगा देता है।

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डाउन पेमेंट न पड़ जाए भारी

      सपनों का घर खरीदना काफी महंगा काम है। अर्थयंत्र द्वारा की गई एक ऐनालिसिस के मुताबिक, डाउन पेमेंट के लिए आपको काफी साल सेविंग पड़ेगी। मुंबई में अगर आप सैलरी का 25 प्रतिशत बचाते हैं तो डाउन पेमेंट के लिए आपको 12 साल सेविंग करनी पड़ेगी। कहानी यहीं खत्म नहीं होगी, इस मासिक सेविंग्स के बाद आप डाउन पेमेंट तो दे देंगे लेकिन हर महीने आपके सामने ईएमआई होगी जो आगे कई साल चलेगी।

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EMI को बोझ

        कहानी यहां भी खत्म नहीं हुई है। पजेशन के बाद आप अपने सपनों के घर रहने जाएंगे तब ईएमआई के अलावा प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना होगा और घर का इंश्योरेंस प्रीमियम भी। अगर आपने किसी लग्जरी वाली सोसाइटी में फ्लैट लिया है तो आपको हर महीने 8 से 10 हजार रुपये मेंटेनेंस चार्ज भी देना होगा। नए महंगे घर को सजाने-संवारने और रिपेयर कराने में भी आपकी जेब ढीली होती रहेगी।

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मार्केट के हाल खराब

       अगर आप यह सोचते हैं कि घर को कभी भी बेचकर अपना पैसा वापस पा लेंगे तो आप अंधेरे में हो सकते हैं। हाल के मार्केट को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आपको मनचाहे पैसे मिल जाएंगे। लोन रेट्स को देखते हुए बहुत बड़ा लोन लेना भी भविष्य में आपको परेशान कर सकता है। इस समय रियल एस्टेट मार्केट निवेश करने के लिहाज से भी सही नहीं है।

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टलता पजेशन

       अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों के साथ एक समस्या बार-बार टलते पजेशन में भी है। कई मामलों में कैश की किल्लत में डिवेलपर प्रॉजेक्ट अधूरा छोड़ देता है। निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज के लिए बड़ा लोन से सतर्क रहें, टैक्स बचाने के चक्कर में आप अपना नुकसान ही करेंगे।

जितनी चादर उतने ही पैर फैलाएं

       मिडल क्लास फैमिली घर लेने में अपने बजट से ज्यादा खर्च कर देती जिसका असर आने वाले महीनों और सालों पर पड़ता है। बड़ा घर लेने पर आपकी सेविंग्स, हर महीने की इनकम और अन्य वित्तीय मामलों पर असर पड़ता है। ज्यादा ईएमआई वाले लोन से हर महीने आपको पैसे की कमी से जुझना पड़ सकता है।

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      एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आप घर लेने का प्लान करें तो ऐसा घर तलाशें जो आपकी जरूरतों को पूरा करें लेकिन जेब में छेद न करे। ऐसा घर लें जो आप अफॉर्ड कर सकें, इससे बाद में नया घर लेने के रास्ते भी खुले रहते हैं। सपनों का घर लेना बड़ा फैसला और आपके जीवन का अहम हिस्सा भी, सोच-समझ कर ही प्रॉपर्टी खरीदें।
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source: एकॉनिमक टाइम्स.

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