अगर बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो जाए तो कैसे बंटेगी प्रॉपर्टी?

0

vasiyat doc.

    वसीयत के न होने से पूरा परिवार कानूनी पचड़ों में फंस जाता है। अदालतों में इस तरह के मामलों की लंबी फेहरिस्त है जिसमें मृतक के परिजन जमीन के लिए आपस में लड़ रहे हैं। इसलिए जीवित रहते हुए वसीयत जरूर बना लेनी चाहिए। इसके कर्इ फायदे हैं। यह परिवार के सदस्यों को बेवजह की कलह-क्लेश से बचाती है। वसीयत के बगैर मृतक के उत्तराधिकारियों को पैसे और प्रॉपर्टी पर दावा करने के लिए अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

     वसीयत न होने से संपत्ति का बंटवारा अनचाहे तरीके से होता है। संभव है कि कोर्इ व्यक्ति अपने किसी उत्तराधिकारी को कुछ ज्यादा देकर जाना चाहता हो। लेकिन विल या वसीयत नहीं है तो संपत्ति का बंटवारा उसके धर्म के अनुसार लागू उत्तराधिकार संबंधी कानूनों के तहत होता है।

क्या कहता है कानूनॽ

हिंदू कानून

     हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों के लिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 और हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 लागू हैं। अगर किसी हिंदू पुरुष की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी प्रॉपर्टी पर सबसे पहला हक क्लास 1 उत्तराधिकारियों का होगा। अगर वे नहीं हैं तो क्लास 2 उत्तराधिकारियों में प्रॉपर्टी बंटेगी।

क्लास 1 उत्तराधिकारी: बेटा/बेटी, विधवा, मां, पहले मर चुके बेटे के बेटे/बेटियां, पहले मर चुकी बेटी की बेटे/बेटियां, बेटे की विधवा।

क्लास 2 उत्तराधिकारी: पिता, बेटे/बेटी का बेटा, बेटे/बेटी की बेटी, भाई, बहन, बहन का बेटा, बहन की बेटी, भाई का बेटा/बेटी

     अगर कोई क्लास 1 या 2 उत्तराधिकारी नहीं है तो दूर का कोर्इ रिश्तेदार, जिसका मृतक से खून का संबंध हो, इसका उत्तराधिकारी बनेगा। अगर यह भी नहीं है तो मृतक की प्रॉपर्टी सरकारी संपत्ति बन जाएगी।

अगर हिंदू महिला की मौत बिना वसीयत के होती है तो उसकी संपत्ति इस तरह ट्रांसफर होगी:

- सबसे पहले बेटों, बेटियों और पति को

- दूसरा, पति के वारिसों को

- तीसरा, माता या पिता को

- चौथा, पिता के वारिसों को

- पांचवां, माता के उत्तराधिकारियों को

इस्लामी कानून

   मुस्लिम कानून दो प्रकार के वारिसों को मान्यता देता है। इनमें से एक हैं शेयरर्स और दूसरे हैं रेजीड्यूरीज। शेयरर्स मृतक की संपत्ति में एक निश्चित हिस्से के हकदार हैं। शेयरर्स के हिस्सा लेने के बाद जो संपत्ति बचती है, उस पर रेजीड्यूरीज का हक होता है।

Share :
Share :
source: नवभारत टाइम्स.

Leave A Reply

Share :