सुप्रीम कोर्ट से सहारा को झटका, ऐंबी वैली की नीलामी रोकने से इनकार

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sahara

      सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट से फिर बड़ा झटका लगा है। पुणे के निकट अपने प्रीमियम प्रॉजेक्ट ऐंबी वैली की नीलामी रोकने के लिए सहारा ग्रुप ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने नीलामी रोकने से इनकार कर दिया। मार्केट रेग्युलेटर सेबी को बकाया रकम न चुकाने की वजह से ऐंबी वैली की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप से लगभग 20,000 करोड़ रुपये चुकाने के लिए कहा था। यह रकम उन इनवेस्टर्स को दी जानी है जिन्होंने सेबी की ओर से अवैध घोषित की गई सहारा ग्रुप की दो स्कीमों में इनवेस्टमेंट किया था।

      राय ने समूह की 34,000 करोड़ रुपये की ऐंबे वैली संपत्ति की बंबई हाई कोर्ट के आधिकारिक परिसमापक द्वारा नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अदालत का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 25 जुलाई को विवादों में घिरे सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को 7 सितंबर तक सेबी-सहारा खाते में 1,500 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया था।

     कोर्ट ने उस समय उनसे कहा था कि इसके बाद ही वह उनके उस आग्रह पर विचार करेंगे कि उन्हें पूरा भुगतान करने के लिए 18 माह का और समय दिया जाए। अदालत ने इसके साथ ही बंबई हाई कोर्ट के आधिकारिक परिसमापक द्वारा संपत्ति की बिक्री के लिए तैयार किए गए बिक्री मसौदे के नोटिस को भी मंजूरी दे दी थी।

     अदालत ने कहा था, ‘आधिकारिक परिसमापक जैसा उस बिक्री नोटिस को प्रकाशित करेगा जो उन्होंने दिखाया है और यह नोटिस 14 अगस्त को प्रकाशित कर दिया जायेगा। बिक्री नोटिस के प्रकाशन के लिये जो भी कदम उठाने पडे़ंगे उनके लिये मंजूरी दी जाती है।’ सहारा समूह ने इससे पहले 24,000 करोड़ रुपये की मूल राशि में से करीब 9,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए 18 महीने का समय मांगा था।

      सिब्बल ने हालांकि इससे पहले कहा था कि समूह के मुताबिक बकाया राशि 8,000 करोड़ रुपये के आसपास है और उसने इस राशि को जमा कराने के लिए हर संभव प्रयास किया है। राय निवेशकों का धन नहीं लौटाने के मामले में करीब दो साल जेल में बिता चुके हैं। पिछले साल 6 मई से वह पैरोल पर हैं। उनकी माता का देहांत होने पर उन्हें पहली बार पैरोल दिया गया था। उसके बाद से उनका पैरोल लगातार बढ़ता रहा है

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