तालाब, कब्रिस्तान पर आवंटित कर दिए प्लाट

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Plot

एलडीए की ठगी का शिकार हुए 1598 आवंटी

दो महीने में सिर्फ आंकड़े जुटा सका डीआरडी

     प्लाट न देने में बिल्डरों के ठगी के मामले सामने आते रहते हैं लेकिन सरकारी संस्था लखनऊ विकास प्राधिकरण से ही 1598 आवंटी ठगी के शिकार हैं। दस से पंद्रह सालों से यह आवंटी एलडीए से अपने प्लाट पर कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

     तालाब, कब्रिस्तान और ईदगाह की जमीन पर प्राधिकरण ने प्लाट आवंटित कर दिए। वहीं कुछ योजनाओं में आवंटी भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई से प्रभावित हैं। इन आवंटियों को भूखंड के स्थान पर फ्लैट व पैसे वापस लेने का दबाव बना रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने विवादित मामलों के लिए दो महीने विवाद समाधान विभाग का गठन किया था। लेकिन दो महीने में सिर्फ विवादित मामलों के आंकड़े ही जुटाए जा सके हैं।

     हालांकि प्राधिकरण के अभियंत्रण, संपत्ति व अर्जन अनुभाग की ढुलमुल कार्रवाई से कई मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि कई भूखंड सिर्फ अतिक्रमण न हटाए जाने से ही प्रभावित हैं।

कानपुर रोड योजना : 46 भूखंडों को तालाब पर आवंटित कर दिया गया है। सेक्टर एल योजना में इन 46 आवटियों में से 17 आवंटी रजिस्ट्री भी करा चुके हैं। मौके पर आवंटित प्लाट तालाब से प्रभावित होने के चलते आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा है।

     वहीं इस मामले में सिविल न्यायालय में स्थगनादेश पारित होने से कार्य करना मुश्किल है। अर्जन अनुभाग के मुताबिक याची से समझौते के आधार पर दोबारा सर्वे कराया गया है। इसके बाद संशोधित ले आउट प्लान तैयार करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद ले आउट पर मंजूरी मिलने के बाद प्रभावित आवंटियों को कब्जा मिल सकेगा।

बसंतकंुज योजना : हरदोई रोड स्थित बसंतकुंज योजना में सेक्टर बी, सी, डी, एन और ओ की बुरी स्थिति है। अर्जन की कार्रवाई के बाद भी भूखंडों पर किसानों का कब्जा है। एलडीए ने 2004 में हरदोई रोड पर बसंत कुंज योजना लांच की थी। जिसमें सेक्टर ओ और सेक्टर एन में चार-चार सौ आवंटियों को भूखंड दिए जाने थे।

     किसानों के बढ़ी दर से प्रतिकर की मांग के चलते विकास कार्य प्रभावित हैं। सेक्टर बी में 34, सेक्टर डी में 109 में सेक्टर ओ में 486, सेक्टर एन में 333, सेक्टर एम में 115 समेत कुल 1077 आवंटी प्रभावित हैं। सेक्टर ओ व एन के ऐसे आवंटियों के लिए लगभग 60.243 हेक्टेअर भूमि में समायोजन कर कब्जा दिलाने को लेकर एलडीए बोर्ड ने गत महीने निर्णय लिया है।

     यह भूमि सामुदायिक सुविधाओं से आवासीय में परिवर्तन करने का निर्णय को एलडीए बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। लेकिन नियोजन की प्लानिंग न होने से मामले का निपटारा नहीं हो पा रहा है। किसानों को बढ़ी दर पर प्रतिकर भुगतान के लिए बोर्ड के निर्णय पर शासन से अनुमति मांगी गई है।

सीतापुर रोड, सेक्टर सी : इस योजना में 108 आवंटियों को कब्जा नहीं मिला है। आवंटित स्थल पर झुग्गी झोपड़ियों के कब्जे से भूखंड प्रभावित हैं। मजे की बात यह है कि भूमि अधिग्रहण हुआ या नहीं, इसकी जानकारी ही एलडीए को नहीं है। अभी तक किसी आवंटी ने रजिस्ट्री नहीं कराई है।

     अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया गया है कि योजना की भूमि के अधिग्रहण की स्पष्ट जानकारी प्राप्त की जाए। अर्जन की कार्रवाई होने पर पंद्रह दिन मंे अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।

गोमती नगर विस्तार : डीआरडी की रिपोर्ट के अनुसार यहां पर चार सेक्टरों में कुल 178 भूखंड विवादित हैं। सेक्टर एक में विवादित 16 भूंखड में से कुछ कोर्ट में फंसे हैं तो कुछ को विस्थापित कोटे मंे प्लाट दिए जाने की कार्रवाई ही नहीं हो सकी है।

     वहीं सेक्टर 4,5, व 6 में ग्राम समाज, कब्रिस्तान, ईदगाह की भूमि अधिग्रहित कर ली है। सेक्टर 4 में 31, सेक्टर 5 में 61 व सेक्टर 6 में 70 प्लाट इन स्थलों पर आवंटित कर दिए हैं। स्थानीय लोग यहां पर कब्जे को लेकर विरोध कर रहे हैं। विस्थापितों को लॉटरी के जरिए भूखंड आवंटित किया जाना है। लेकिन पात्र और अपात्रों का चयन न होने से कार्रवाई लटकी है।

मानसरोवर योजना : सेक्टर ओ में भूमि अधिग्रहण से 159 भवन अथवा भूखंड विवादित हैं। हालांकि अभियंत्रण और संपत्ति अनुभाग की रिपोर्ट में समानता नहीं है। बताया जा रहा है कि कई संपत्तियों को पहले ही निस्तारित किया जा चुका है लेकिन इसका कोई रिकार्ड नहीं है।

     सेक्टर पी में अधिग्रहण से 30 भूखंड प्रभावित हैं। इसमें से 29 ने रजिस्ट्री करा ली है। मौके पर विवाद होने के चलते कब्जा नहीं मिल पा रहा है। अभियंत्रण विभाग की ढुलमुल पैरवी से मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

     प्लाट न देकर फ्लैट व पैसा वापस लेने का दिया जा रहा ऑफर

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