‘होमबायर्स का अधिकार बढ़ने से लेंडर्स को होगी मुश्किल’

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    बिल्डर के डिफॉल्ट हो जाने की सूरत में अब होम लोन बायर्स उससे अपने बकाया का कुछ हिस्सा वसूल कर सकते हैं। उन्हें सरकार की तरफ से हाल ही में मिले इस अधिकार से बिल्डर के लेंडर्स की परेशानी बढ़ जाएगी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का कहना है कि इसके चलते लेंडर्स को आनेवाले समय में ज्यादा हेयरकट से संतोष करना पड़ेगा।

      कैबिनेट ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के तहत होम बायर्स को ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के बजाय फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा देनेवाले ऑर्डिनेंस को क्लीयर कर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि जब डिफॉल्टिंग बिल्डर को लिक्विडेट किया जाएगा तो उस प्रोसेस में होम बायर्स को फाइनेंशियल लेंडर्स के बराबर माने जाएगा। रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘इससे लेंडर्स पर नेगेटिव असर हो सकता है क्योंकि रिकवरी में हासिल रकम का अब एक और हिस्सेदार होगा। अब तक लेंडर्स डिवेलपर को लोन बांटते वक्त इस फैक्टर पर विचार नहीं करते थे।’

      पहले होम बायर्स को ऑपरेशनल क्रेडिटर्स माना जाता था और उनके हितों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया गया था। लेकिन अब वे बिल्डर के डिफॉल्ट होने पर बकाया रकम का कुछ हिस्सा वसूल कर सकेंगे। अब तक के नियमों के हिसाब से बायर्स को पेमेंट फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का बकाया चुकाने के बाद बची रकम के हिसाब से किया जाता रहा था। इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि लिक्विडेशन से हासिल होनेवाली रकम में लेंडर्स की हिस्सेदारी घटने के चलते अब उन्हें अपनी लेंडिंग यील्ड की प्राइसिंग नए सिरे से करना होगा। इससे डिवेलपर्स का लेंडिंग रेट उनके क्रेडिट प्रोफाइल के हिसाब से बढ़ जाएगा।

      अगर क्लेम के मामले में होम बायर्स को सिक्योर्ड के बराबर माना जाएगा तो लेंडर्स के हेयरकट में बढ़ोतरी होगी। लेकिन लेंडिंग यील्ड की दोबारा प्राइसिंग होने पर जरूरी नहीं कि रियल एस्टेट के दाम में बढ़ोतरी हो क्योंकि बिल्डर्स जरूरत का सिर्फ 20-30% ही इंस्टीट्यूशनल लेंडिंग से जुटाते हैं। बाकी रकम उन्हें होम बायर्स से कंस्ट्रक्शन लिंक्ड रिसीट से मिलता है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि डिवेलपर्स कॉस्ट में बढ़ोतरी होने पर उसका बोझ खुद उठा लेंगे क्योंकि फिलहाल मार्केट में प्राइस हाइक झेलने की कैपेसिटी बहुत कम है। बाजार में साथ ही पहले से ही बहुत सी इनवेंटरी पड़ी है।

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source: नवभारत टाइम्स, कोलकाता.

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