बिल्डर ने 99 की जगह बना दिए 214 फ्लैट, जीडीए ने दिया तोड़ने का नोटिस

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    राजेंद्रनगर में बिल्डर ने 99 की अनुमति लेकर 214 फ्लैट बना दिए। इसके बाद बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के आवंटियों को पजेशन भी दे दिया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद जीडीए ने इस बहुमंजिला इमारत को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया है। इस मामले में बिल्डर चुप्पी साधे हुए है और फ्लैट में रहने वाले आशियाना बचाने को अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। ध्वस्तीकरण के नोटिस के खिलाफ कमिश्नर के यहां अपील दायर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इसके लिए नोटिस की सर्टिफाइड कॉपी चाहिए और जीडीए अधिकारी आवंटियों को थर्ड पार्टी बताकर यह कॉपी देने से मना कर रहे हैं। इससे पहले लोगों ने एसएसपी से मुलाकात कर बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली।

क्या है मामला

     रिवर बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड ने 2010 में अथॉरिटी से 99 यूनिट का नक्शा पास कराया था। इसके बाद उसने 115 यूनिट अधिक बना दिए और 2014 तक 199 लोगों को पजेशन भी दे दिया। 2015 में जीडीए ने अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी कर कंपाउंडिंग की। 13.55 करोड़ रुपये पेनाल्टी और ब्याज जमा करने को कहा गया। नोटिस जारी होने के बाद बिल्डर ने 8 सितंबर 2015 को 4.5 करोड़ और 27 जनवरी 2016 को 1.5 करोड़ रुपये जमा कराए थे। पिछले दिनों जीडीए ने ब्याज के साथ 10 करोड़ रुपये बकाया होने का नोटिस भेजा। पैसा नहीं जमा हुआ तो आरसी जारी कर दी। इसके विरोध में बिल्डर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। कोर्ट ने अथॉरिटी को अवैध निर्माण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया। इस पर जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी ने बिना कंपाउंडिंग वाले हिस्से को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया।

‘हम प्रभावित और हमें ही थर्ड पार्टी बता रहा जीडीए’

    हम लोग 2013 से इस बिल्डिंग में परिवार के साथ रह रहे हैं। जब तक जीडीए और बिल्डर के बीच पैसे को लेकर विवाद चल रहा था, तब तक हम इस मामले से दूर थे। अब अचानक बिल्डिंग को ध्वस्त करने का नोटिस आ गया है। हम लोग बीच में फंस गए हैं। – आर.पी. झा

    बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय जीडीए फ्लैट खरीदने वालों को परेशान कर रहा है। बिल्डर के खिलाफ एफआईआर तक नहीं दर्ज की गई है। बिल्डिंग को ध्वस्त करने का नोटिस दिया गया है, लेकिन इससे बिल्डर पर क्या फर्क पड़ेगा। – अवधेश सिंह

     अभी तक जीडीए की तरफ से हमें कोई खास मदद नहीं मिली है। कमिश्नर के पास अपील करने के लिए नोटिस की सर्टिफाइड कॉपी चाहिए, लेकिन अथॉरिटी के अफसर इतना भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। हमें थर्ड पार्टी बताया जा रहा है। – भूपेंद्र कुमार त्यागी

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source: नवभारत टाइम्स, गाजियाबाद.

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