मास्टर प्लान संशोधन पर आईं आपत्तियों को लेकर माथापच्ची

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    दिल्ली में दुकानों को सीलिंग से बचाने के लिए मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन को लेकर आईं आपत्तियों पर अब सरकार में माथापच्ची शुरू हो गई है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इन आपत्तियों के विश्लेषण की प्रक्रिया अपनाने के लिए मंगलवार को स्थानीय निकायों के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

     इस बैठक में मंत्रालय के सचिव, उपराज्यपाल के अलावा डीडीए के उपाध्यक्ष और तीनों नगर निगमों के आयुक्त भी शामिल थे। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दरअसल अदालत के निर्देश के बाद मास्टर प्लान में संशोधन के प्रस्तावों को डीडीए ने 26 मई को नोटिफाई करके पब्लिक और अन्य पक्षों से इस पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की थीं। सरकार को अब तक लगभग 700 आपत्तियां और सुझाव मिले हैं। इनमें से कुछ लोगों ने तो प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति करते हुए सवाल उठाए हैं।

     मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि हालांकि इस बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया गया लेकिन इस बात पर जरूर विचार-विमर्श हुआ कि जो भी आपत्तियां और सुझाव मिले हैं, उनका किस तरह से विश्लेषण किया जाए ताकि यह फैसला लिया जा सके कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों में कोई बदलाव करने की आवश्यकता है या नहीं। विश्लेषण के आधार पर ही तय किया जा सकेगा कि जो भी प्रस्तावित संशोधन हैं, उन्हें ज्यों का त्यों लागू किया जाए या फिर उनमें से कुछ को ड्रॉप किया जाए या फिर उनमें ही कुछ बदले जाएं।

       सूत्रों के मुताबिक दरअसल, इस बार सरकार भी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। इसकी वजह यह है कि सरकार को लग रहा है कि आंख-कान मूंदकर भूमि अतिक्रमण करने वालों को छूट नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि सरकार चाहती है कि जिन दुकानदारों को सही मायने में मदद की जरूरत है, उन्हें दी जाए लेकिन ऐसा न हो कि दिल्ली स्लम में बदल जाए। इसी वजह से मंत्रालय की कोशिश है कि आरडब्ल्यूए और दुकानदारों की मांगों के बीच बैलेंस किया जाए। मंत्रालय की चिंता यह भी है कि इस मामले में अदालत की भी निगाह है, इसलिए फिलहाल मंत्रालय सभी पक्षों की सहमति लेकर ही फैसला करने के पक्ष में है।

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source: नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली.

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