बदल गई लैंड पूलिंग पॉलिसी, दिल्ली को जल्द मिल सकेंगे 25 लाख मकान

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       लैंड पूलिंग से जुड़ा नया फैसला गुरुवार को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और आवास एवं शहरी कार्यमंत्री हरदीप पुरी के बीच हुई बैठक में लिए गए। बैठक में सचिव दुर्गा शंकर मिश्र भी मौजूद थे। मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, इस बैठक में तय किया गया कि डीडीए की भूमिका सुविधा उपलब्ध कराने वाली की होनी चाहिए, इसलिए जमीन के टाइटल के ट्रांसफर की प्रक्रिया को कम करके इस पॉलिसी को लागू होने में लगने वाले वक्त को कम किया जा सकता है। अब जिस जमीन को डिवेलप करना होगा, उसे डीडीए के नाम ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं होगी।

        डीडीए उस जमीन पर सुविधाएं विकसित करने के अलावा प्लानिंग भी करेगा ताकि वहां बनने वाले मकान तय मानकों और तय नियमों के मुताबिक बनें। इन सुविधाओं में पार्क से लेकर वे सभी सुविधाएं शामिल होंगी, जो किसी भी रिहाइशी एरिया में होनी चाहिए। इन सुविधाओं यानी सड़कों, पार्क, कम्युनिटी सेंटर के बाद बचने वाली जमीन फिर से जमीन मालिक को दे दी जाएगी ताकि वह वहां मकानों का निर्माण करके उन्हें बेच सके। बैठक में लैंड पूलिंग पॉलिसी के लागू होने में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई।

       इसी पॉलिसी के लिए 89 गांवों को दिल्ली म्युनिसिपल ऐक्ट के तहत शहरी क्षेत्र घोषित करने का कार्य लंबे वक्त से अटका हुआ था। आवास मंत्री ने दिल्ली के उपराज्यपाल को इन गांवों को म्युनिसिपल ऐक्ट के तहत नोटिफाई करने के लिए धन्यवाद करते हुए कहा कि इस अड़चन के दूर होने से अब इस पॉलिसी पर जल्द ही काम होगा।

डीडीए के नाम नहीं होगी जमीन ट्रांसफर

       दिल्ली में लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर लिए गए नए फैसले के बाद अब इस काम में तेजी आएगी। इस पॉलिसी के तहत जिन किसानों या डिवेलपर की जमीन होगी, वह उनके नाम ही रहेगी, डीडीए को ट्रांसफर नहीं करना पड़ेगा। इस फैसले से दिल्ली में अपने घर का सपना संजोए लोगों को राहत मिलेगी क्योंकि अब प्रक्रिया आसान होने से काम तेजी से किया जा सकेगा। आइए जानते हैं कि आपको इस फैसले से क्या फायदा होगा:

मिलेगा सबको मकान, बसेगा एक नया शहर

     लैंड पूलिंग पॉलिसी में मास्टर प्लान 2021 के तहत आने वाले जोन जे, के1, एल, एन और पी2 जोन शामिल हैं। यहां बनने वाले मकानों के लिए एफएआर 400 देने का फैसला लिया गया है। आमतौर पर यह 150 होता है। सस्ते मकानों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त 15 फीसदी एफएआर भी मंजूर किया गया है।

      इस क्षेत्र में मकानों के निर्माण के लिए 22 हजार हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होगी। इससे अनुमान है कि यहां 20 से 25 लाख मकान बनेंगे और उनमें लगभग 95 लाख लोग रहेंगे। इस तरह से आने वाले कुछ सालों में यह क्षेत्र एक और उपनगर के रूप में विकसित होता नजर आएगा।

       इस पॉलिसी के तहत जितनी जमीन होगी, वह पहले डीडीए को दी जाएगी। इसके बाद डीडीए वहां सड़कें, पार्क आदि की प्लानिंग करेगी और इन कार्यों के लिए जमीन की पहचान की जाएगी। इसके अलावा वहां सीवर लाइन, पेयजल लाइनें आदि बिछाई जाएंगी। उसके बाद बाकी बची जमीन वापस दी जाएगी।

         मोटे तौर पर यह माना गया है कि अगर जमीन 20 हेक्टेयर है तो उसमें 60 फीसदी जमीन वापस होगी जबकि 40 फीसदी पर जनसुविधाएं विकसित होंगी। इसी तरह से अगर जमीन 2 से लेकर 20 हेक्टेयर है तो 48 फीसदी लैंड वापस होगी। जो 60 फीसदी जमीन वापस होगी, उसमें 53 फीसदी पर आवासीय मकान, 5 फीसदी जमीन पर कमर्शल और 2 फीसदी पब्लिक और सेमी पब्लिक इस्तेमाल के लिए होगी।

      यहां गरीबों के लिए बनने वाले सस्ते मकान का साइज 32 से 40 मीटर रखना होगा और आधे मकान उस क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए रखने होंगे।

      डीडीए जो जमीन लेगी, उसमें से कुछ पर वह मकान बनाकर उन्हें बेचेगी। इस तरह से वह अपने खर्चों की भरपाई करेगी।

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source: एकॉनिमक टाइम्स, नई दिल्ली.

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