दिवालिया के कगार पर पहुंचा जेपी ग्रुप, 32 हजार होम बायर्स के लिए हैं ये ऑप्शन

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       रियल एस्‍टेट और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर की नामचीन कंपनी जेपी इंफ्राटेक दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है। बृहस्‍पतिवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ इन्‍सोलवेंसी (दिवालिया) प्रोसेस शुरू करने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि इसके बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रुप के लगभग 32 हजार फ्लैट्स निर्माणाधीन हैं, उनके बायर्स का क्‍या होगा। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि बायर्स के लिए अभी भी उम्‍मीद बची हुई हैं, इसलिए बायर्स को निराश नहीं होना चाहिए। हालांकि बायर्स का कहना है कि अब अगर सरकार ही हस्‍तक्षेप करे तो हमें घर मिल सकते हैं।

क्‍या है आगे की राह

      नौ अगस्‍त (बृहस्‍पतिवार) को एनसीएलटी ने अपने फैसले में जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ इन्‍सॉलवेंसी प्रोसेस शुरू करने को कहा है और गुरुग्राम की अनुज जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट को एं‍टरिम रिजॉल्युशन प्रोफेशनल नियुक्‍त किया है। अनुज जैन को अगले 180 दिन में ऐसा प्‍लान तैयार करना होगा, जिसमें उन्‍हें यह बताना होगा कि जेपी इंफ्रा कैसे अपने कर्ज को उतार सकते हैं। इसमें रिजॉल्‍युशन प्रोफेशनल को दोनों पक्षों ( जेपी इंफ्रा और आईडीबीआई बैंक) से भी बात करनी होगी। यदि 180 दिन में रिजॉल्‍युशन प्‍लान तैयार नहीं होता है तो एनसीएलटी 90 दिन का समय दे सकता है। यदि तब भी कोई प्‍लान तैयार नहीं होता है तो एनसीएलटी जेपी इंफ्रा की संपत्ति को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

बायर्स का क्‍या होगा

      बैंकिंग सेक्‍टर के एक्‍सपर्ट और एसबीआई के रिटायर्ड सीजीएम सुनील पंत ने मनीभास्‍कर को बताया कि रिजॉल्‍युशन प्रोफेशनल प्‍लान बनाते वक्‍त सीए अनुज जैन जेपी इंफ्रा पर कुल कर्ज का भी ब्‍यौरा इकट्ठा करेंगे। इसमें फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के अलावा ऑपरेटिंग क्रेडिटर्स भी शामिल होंगे। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में बैंक या सीधे लोन देने वाले संस्‍थान शामिल होंगे, जबकि ऑपरेटिंग क्रेडिटर्स में जेपी एसोसिएट्स को सर्विस देने वाले क्रेडिटर्स को शामिल किया जाएगा। पंत ने कहा कि होम बायर्स ऑपरेटिंग़ क्रेडिटर्स की कैटेगिरी में शामिल होंगे, इसलिए रिजॉल्‍युशन प्‍लान में बायर्स के क्रेडिट का भी जिक्र होगा और रिजॉल्‍युशन प्रोफेशनल यह भी प्रपोजल रख सकता है कि होम बायर्स को किस तरह राहत पहुंचाई जा सकती है। हालांकि इन्‍सॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड में स्‍पष्‍ट है कि पहले फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को पेमेंट की जाए। उसके बाद ऑपरेटिंग क्रेडिटर्स को पेमेंट की जाए।

यह हो सकता है ऑप्‍शन

       पंत के मुताबिक, रिजॉल्‍युशन प्‍लान में यह भी प्रपोजल रखा जा सकता है कि जेपी ग्रुप अपने रेसिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करके होम बायर्स को उनके घर मुहैया करा दे और बायर्स से मिलने वाली बकाया राशि से बैंकों का कर्ज निपटा दे। यदि 270 दिन के भीतर कोई प्‍लान तैयार नहीं हो पाता है और केस लिक्विडेशन में चला जाता है तो संभव है कि जो भी कंपनी जेपी के एसेट खरीदती है तो वह रेसिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करने पर ध्‍यान दे सकती है। हालांकि पंत मानते हैं कि जेपी इंफ्राटेक बायर्स के पैसे तो वापस नहीं लौटा पाएगा, ऐसे में बायर्स के लिए परेशानी तो बढ़ गई है।

लेकिन बायर्स हैं नि‍राश

       जेपी ग्रुप के होम बायर्स के संगठन से जुड़े देवेंद्र ने कहा कि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि बायर्स ऑपरेटिंग क्रेडिटर्स की कैटेगिरी में शामिल होंगे या नहीं। अगर ऑपरेटिंग क्रेडिटर्स की कैटेगिरी में शामिल होने पर भी हमें उतना पैसा तो नहीं मिलेगा,‍ जितना हम पेमेंट कर चुके हैं। अब तो एक ही रास्‍ता बचता है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्‍तक्षेप करे और हमें या तो फ्लैट दिलाए या पूरा पैसा वापस दिलाए।

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