तेलंगाना ने पीएम आवास योजना में खाता भी नहीं खोला, केंद्र ने वापस मांगी रकम

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PMAY

    केंद्र सरकार ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तेलंगाना सरकार से 190 करोड़ रुपये की वह रकम वापस मांगी है जो उसे 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत गांवों में गरीबों के लिए मकान बनाने के लिए दी गई थी। केंद्र ने यह कदम तब उठाया जब चंद्रशेखर राव की अगुआई वाली तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार को योजना के कार्यान्वयन की प्रगति के बाबत ताजा जानकारी देने से इनकार कर दिया। 2016-17 में तेलंगाना को इस योजना के तहत 70,674 मकानों का आवंटन किया गया था और उनके लिए पहली किस्त के तौर पर 190.78 करोड़ रुपये की रकम जारी की गई थी।

      ईटी ने एंपावर्ड कमिटी की 13 अक्टूबर की मीटिंग के डीटेल देखे हैं, जिसमें तेलंगाना को केंद्र सरकार के फैसले के बारे बताया गया था। बैठक की डीटेल के मुताबिक, ‘रूरल डिवेलपमेंट सेक्रटरी ने मीटिंग में यह भी कहा कि दो साल गुजर जाने के बाद भी तेलंगाना ने PMAYG के तहत मकानों के आवंटन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई है और आवाससॉफ्ट पर प्रगति की ताजा जानकारी भी नहीं डाली है। आवाससॉफ्ट एक ऑनलाइन पोर्टल है जहां कार्य की प्रगति का अपडेट डाला जाता है। यह फैसला हुआ है कि तेलंगाना मिनिस्ट्री को 190.78 करोड़ रुपये वापस करेगा क्योंकि उसने PMAY-G में राज्य ने कोई प्रगति नहीं दिखाई है।’

     इतना ही नहीं, मीटिंग में यह भी फैसला किया गया कि तेलंगाना को अलॉट किए गए 70,674 मकानों का टारगेट अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे राज्यों/जरूरतमंद राज्यों को दिया जाएगा ताकि मिनिस्ट्री PMAY-G के तहत 2018-19 तक देशभर में एक करोड़ मकान बनाने का टारगेट पूरा करने में मदद मिल सके। तेलंगाना ने 2016-17 के लिए PMAY-G के लिए तय किए गए फंड की दूसरी किस्त अब तक नहीं मांगी है। मिनिस्ट्री के पोर्टल के मुताबिक, तेलंगाना ने PMAY-G के तहत एक भी मकान नहीं बनाया है जबकि इस योजना के तहत देशभर में अब तक लगभग 52 लाख मकान बन चुके हैं।

    मिनिस्ट्री के एक सीनियर अफसर ने बताया कि तेलंगाना सरकार असल में अपनी राजकीय आवासीय योजना को बढ़ावा देने में जुटी है। इस स्कीम में बेघर गरीबों को दो बेडरूम का मकान देने का प्लान है। उन्होंने कहा, ‘यह काम भी कॉन्ट्रैक्टर वाले सिस्टम के जरिए कराया जा रहा है और इसमें मकानों के लिए PMAY-G से बड़ा फाइनैंशल पैकेज मुहैया कराया जा रहा है जबकि PMAY-G में बेनेफिशिरी को अपने लिए मकान खुद बनाना है।’ उन्होंने कहा कि PMAYG योजना के तहत योग्य लाभारथियों को राज्य सरकार की स्कीम में कवर किया गया हो, लेकिन इसके बारे में राज्य की तरफ से केंद्र को बताया जाना जरूरी है।

      PMAYG में बेघर और एक कमरे के कच्चा मकान वालों को लाभार्थी माना जाता है। सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘एंपावर्ड कमिटी ने भले ही यह फैसला ले लिया हो, लेकिन अगर तेलंगाना हमें आधिकारिक आंकड़े मुहैया कराता है तो स्थिति यथावत हो जाएगी।’

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source: नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली.

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