गांवों का लैंड रेकॉर्ड्स डिजिटल करने में आ रही हैं रुकावटें

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The Amputation village near Basra, Iraq

    दिल्ली के गांवों की भूमि की असलियत का पता करने, वहां सालों पुराने कब्जे आदि की जानकारी के लिए दिल्ली सरकार उनकी जमीन का रेकॉर्ड्स डिजिटल (कंप्यूटराइज्ड) कर रही है। लेकिन कुछ गांवों की जमीन का विभिन्न कारणों से डिजिटलाइजेशन नहीं हो पा रहा है। इस समस्याओं को निपटाने के लिए राजस्व विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।

    राजधानी के गांवों की जमीन का रेकॉर्ड्स डिजिटल करने का निर्णय दिल्ली की पूर्व कांग्रेस सरकार ने लिया था। इसका मकसद यह था कि कम से राजस्व विभाग को इस बात की प्रामाणिक जानकारी मिल सके कि गांव की असली भूमि कितनी है और कितनी प्रतिशत भूमि पर कब्जा हो चुका है या पुराने दस्तावेजों में कितना बदलाव हो चुका है। डिजिटल करने का यह काम राजस्व विभाग कर रहा है। विभाग के अनुसार राजधानी क कुछ 224 गांवों की जमीन का रेकॉर्ड्स डिजिटल किया जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक 192 गांवों की जमीन का रेकॉर्ड्स डिजिटल कर दिया गया है। इन गांवों को लेकर किसी प्रकार की समस्या नहीं है और ऑनलाइन भी इन गांवों का पूरा भूगोल चेक किया जा सकता है।

     राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार लेकिन 32 गांवों की जमीन का रेकॉर्ड्स कुछ कारणों से डिजिटल नहीं हो पा रहा है। इन गांवों में घरौंडा, नीमका खादर, चिल्ला, कोटला, खिचड़ीपुर, शक्करपुर खास, गाजीपुर, खुरैजी, घोंडा गुजरान बांगर, समयपुर, बादली, झरौड़ा माजरा बुराड़ी, मुकुंदपुर, दरियापुर कलां, पूठखुर्द, नंगली पूना, सभापुर शाहदार, मोलडबंद असोला, भाटी, देवली आदि शामिल हैं। विभाग के एक आला अधिकारी के अनुसार इन गांवों की जमीन का रेकॉर्ड्स इसलिए डिजिटल नहीं हो पा रहा है, क्योंकि इनमें से कुछ पूरी तरह शहरीकृत हो चुके हैं, कुछ में पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट लागू होने के कारण, कुछ की चकबंदी चल रही है, कुछ का रेकॉर्ड गायब मिला है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी आ रही हैं। अधिकारी के अनुसार इन बाधाओं को दूर किया जा रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती है।

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source: नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली.

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