लोन लेकर भी नया घर खरीदा हो तो पहले घर की बिक्री पर LTCG टैक्स से छूट मिलेगीः ITAT

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    नया घर खरीदने पर निवेश आधारित कैपिटल गेंस टैक्स में मिलनेवाली छूट पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि टैक्सपेयर ने नया घर खरीदने के लिए होम लोन भी लिया है। यह स्पष्टीकरण इनकम टैक्स अपेलट ट्राइब्यूनल (आईटीएटी) की कोलकाता बेंच ने दिया है। इनकम टैक्स ऐक्ट के तहत कैपिटल गेंस (पूंजीगत लाभ) टैक्स के दायरे में आता है।

कैपिटल गेंस टैक्स और इंडेक्सेशन बेनिफिट

    अगर किसी ने कम-से-कम दो साल तक के अपने मालिकाना हक वाले घर को बेचकर लाभ कमाया हो तो लाभ की रकम को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) माना जाएगा। इस रकम पर 20% का टैक्स लगता है, हालांकि टैक्सपेयर को इसमें इंडेक्सेशन बेनिफिट भी मिलता है। दूसरे शब्दों में कहें तो एलटीसीजी टैक्स वसूली के फॉर्म्युले के तहत टैक्सपेयर को हुए कुल लाभ पर टैक्स जोड़ते वक्त निवेश और बिक्री के बीच के वर्षों में बढ़ी महंगाई का ध्यान रखा जाता है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट महंगाई दर के मुताबिक कुल टैक्स की रकम में कटौती कर देता है। इस तरह टैक्सपेयर को इंडेक्सेशन बेनिफिट मिल जाता है।

I-T ऐक्ट के सेक्शन 54 के तहत बड़ी राहत

       आयकर कानून की धारा 54 के तहत निवेश आधारित पूंजीगत लाभ पर टैक्स छूट दी जाती है। अगर कोई व्यक्ति देश में निर्धारित समयसीमा के अंदर दूसरा मकान खरीदता है, तब पहले मकान की बिक्री से हुए लाभ में से दूसरे मकान की खरीद की रकम घटा दी जाती है। फिर जो रकम बच जाती है, उसे ही कर योग्य पूंजीगत लाभ (टैक्सेबल कैपिटल गेंस) माना जाता है। इस तरह, पहले मकान की बिक्री से हुए लाभ पर टैक्स में बड़ी राहत मिलती है। राहत का दायरा यहां तक होता है कि अगर पहले मकान की बिक्री से हुए लाभ की रकम के बराबर या ज्यादा कीमत का दूसरा घर खरीद लिया जाए तो टैक्स के रूप में एक रुपया भी नहीं देना पड़ता है। यानी, पहले मकान की बिक्री से हुए लाभ की पूरी रकम टैक्स फ्री हो जाती है।

ये हैं टैक्स छूट पाने की शर्तें

      हां, इसके लिए शर्त यह है कि नया मकान पहला मकान खरीदने के एक साल के अंदर या पहला मकान बेचने के दो साल पहले खरीद लिया गया हो। इसके अलावा, अगर पुराना मकान बेचने की तारीख के तीन साल के अंदर नया मकान बनवाया जाए तो भी एलटीसीजी टैक्स में फॉर्म्युले के तहत उचित छूट मिल जाती है।

अपेलट के सामने गया यह मामला

       4 अप्रैल को जिस मामले में इनकम टैक्स अपेलट ट्राइब्यूनल ने आदेश दिया, उसमें टैक्सपेयर अमित पारेख ने इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 54 के प्रावधानों के तहत 59 लाख रुपये पर कैपिटल गेंस टैक्स से छूट का दावा किया। टैक्स का आकलन करते वक्त इनकम टैक्स अधिकारियों को पता चला कि पारेख ने आईसीआईसीआई बैंक से 82 लाख रुपये का होम लोन लिया और पुराने घर की बिक्री से हुए लाभ का महज 9.37 लाख रुपये ही नए घर की खरीद में लगाए।

इनकम टैक्स ऑफिसर का आकलन

       इसपर इनकम टैक्स ऑफिसर ने कहा कि पारेख का निवेश सेक्शन 54 के प्रावधानों की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। ऐसे में सिर्फ 9.37 लाख रुपये पर ही एलटसीजी टैक्स से छूट की अनुमति दी गई और कुल 59 लाख रुपये के कैपिटल गेंस की शेष राशि (49.70 लाख रुपये) को पारेख की आमदनी बता दी गई। पारेख ने इनकम टैक्स ऑफिसर के इस आकलन के खिलाफ ट्राइब्यूनल का दरवाजा खटखटाया जिसने पारेख का दावा मानते हुए उपर्युक्त फैसला दिया। ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि पारेख ने तय समयसीमा के अंदर नया मकान खरीद लिया था, इसलिए सिर्फ इस बुनियाद पर उन्हें टैक्स छूट से महरूम नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने नए घर के लिए होम लोन ले रखा था।

बाद में बेचे गए मकान के पैसे से पहले कैसे खरीदेंगे घर?

      चार्टर्ड अकाउंटैंट्स फर्म सीएनके ऐंड असोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गौतम नायक ने कहा, ‘टैक्स छूट के दावे में इस बात का कोई लेनादेना ही नहीं है कि नए मकान के लिए फंड कैसे जुटाया गया। सेक्शन 54 में इसकी छूट दी गई है। दरअसल, कानून के तहत पुराना घर बेचने के एक साल के अंदर तक भी नया आवासीय मकान खरीदने की अनुमति दी गई है। इसका स्पष्ट मतलब है कि नया मकान खरीदने के लिए पुराने मकान की बिक्री का पैसा इस्तेमाल नहीं लगाया जा सकता।’

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source: एकॉनिमक टाइम्स.

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