इंटरनेशनल इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी इंडेक्‍स में सुधरी भारत की रैंकिंग, 50 देशों में पाया 44वां स्‍थान

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    इंटरनेशनल इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी (IP) इंडेक्‍स में भारत ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है और 44 पायदान पर पहुंच गया है। इस बार इस इंडेक्‍स में 50 देश हैं। पिछले साल इंडेक्‍स में 45 देश थे, जिनमें भारत का स्‍थान 43वां था। हालांकि अभी भी भारत को अपनी पॉलिसी को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्‍त और अर्थपूर्ण सुधार करने की जरूरत है। यह बात यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने एक रिपोर्ट में कही।

       बेहतर स्‍कोर हासिल करने के बावजूद अभी भी देश काफी निचली पोजिशन पर है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के ग्‍लोबल इनोवेशन पॉलिसी सेंटर (GIPC) द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रैंकिंग नए इं‍डीकेटर्स में देश के मजबूत प्रदर्शन, कंप्‍यूटर इंप्‍लीमेंटेड इन्‍वेंशंस की पेटेंटेबिलिटी की दिशा में किए गए सकारात्‍मक प्रयासों को दर्शाती है।

टॉप पर रहा अमेरिका

      आईपी इंडेक्‍स में 37.98 पॉइंट्स के साथ टॉप पर अमेरिका रहा। उसके बाद 37.97 पॉइंट्स के साथ ब्रिटेन और 37.03 पॉइंट्स के साथ स्‍वीडन का स्‍थान रहा। GIPC की सालाना रिपोर्ट दर्शाती है कि जुलाई 2017 में भारत ने कंप्‍यूटर रिलेटेड इन्‍वेंशंस के एग्‍जामिनेशन के लिए गाइडलाइन्‍स जारी की थीं। इन गाइडलाइन्‍स ने देश में टेक्‍नोलॉजिकल इनोवेशंस के लिए पेटेंटेबिलिटी इनवायरमेंट को बेहतर बनाया है। साथ ही सरकार ने IP अवेयरनेस वर्कशॉप, टेक्निकल ट्रेनिंग, इन्‍फोर्समेंट एजेंसियों के लिए प्रोग्राम्‍स, नेशनल इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पॉलिसी को भी लागू किया।

अभी भी ये हैं भारत के कमजोर पहलू

      रिपोर्ट में आगे कहा गया कि लाइफ साइंसेज आईपी के प्रोटेक्‍शन के लिए सीमित फ्रेमवर्क, इंटरनेशनल स्‍टैंडर्ड्स से अलग पेटेंटेबिलिटी जरूरत, लंबी प्री ग्रांट विरोधी अपोजीशन प्रोसिडिंग्‍स, पहले प्रयोग की जाने वाली कॉमर्शियल और गैर आकस्मिक हालात के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग, इंटरनेशनल आईपी वार्ता में सीमित भागीदारी और इंटरनेशनल पेटेंट प्रोसिक्‍यूशन हाइवे ट्रैक्‍स में भागीदारी न होना भारत के कमजोर पहलू हैं। GIPC के वाइस प्रेसिडेंट पैट्रिक किलब्राइड ने कहा कि भारत की रैंकिंग किसी भी देश द्वारा रैंकिंग में किया गया सबसे बड़ा सुधार है।

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source: मनी भास्कर.

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